भारत में आर्थिक सुधारों और औद्योगिक नीतियों से व्यापार को नई दिशा

भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। वैश्विक स्तर पर आर्थिक उतार-चढ़ाव, महामारी के बाद की चुनौतियाँ और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत ने अपनी विकास दर को बनाए रखा है। इसका सबसे बड़ा कारण सरकार द्वारा लागू किए गए आर्थिक सुधार और उद्योगों से जुड़ी नीतियाँ हैं। इन सुधारों और नीतियों का उद्देश्य न केवल घरेलू व्यापार को सशक्त बनाना है, बल्कि विदेशी निवेश को आकर्षित करना और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का मज़बूत हिस्सा बनाना भी है। पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार ने कर व्यवस्था, श्रम कानून, औद्योगिक नीतियों और उत्पादन प्रोत्साहन योजनाओं में बड़े बदलाव किए हैं। इससे व्यापारिक माहौल में सुधार आया है और उद्यमियों को नई दिशा मिली है।

भारत में आर्थिक सुधारों की शुरुआत 1991 में हुई थी, जब उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीति अपनाई गई थी। लेकिन 2014 के बाद सुधारों की गति और तेज हुई। मौजूदा सरकार ने ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस पर विशेष ध्यान दिया। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए न केवल नियमों को सरल बनाया गया बल्कि पारदर्शिता पर भी ज़ोर दिया गया।

भारत में कर सुधारों की दिशा में सबसे बड़ा कदम वस्तु एवं सेवा कर को लागू करना था। पहले अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कर प्रणाली होने से व्यापारियों को दिक्कत होती थी। लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद एक समान कर व्यवस्था बनी, जिससे कारोबार करना आसान हुआ। हाल ही में सरकार ने इसे और सरल बनाने के लिए स्लैब में बदलाव करने की योजना बनाई है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कर घटाकर 5% किया गया है, जबकि लग्ज़री आइटम्स पर कर दर 40% तक रखी गई है। इससे दो बड़े फायदे होंगे। पहला, आम उपभोक्ता को राहत मिलेगी, दूसरा, सरकार को पर्याप्त राजस्व भी प्राप्त होगा।

सरकार ने उद्योगों के विकास के लिए राज्य स्तर पर नई नीतियाँ लागू की हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में फुटवियर और लेदर पॉलिसी 2025 लागू की है। इस नीति के अंतर्गत बुंदेलखंड और पूर्वांचल में नए उद्योग स्थापित करने पर विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे न केवल स्थानीय युवाओं को रोज़गार मिलेगा बल्कि राज्य का निर्यात भी बढ़ेगा। इसी प्रकार, लखनऊ के अमौसी औद्योगिक क्षेत्र में ₹31 करोड़ की परियोजना शुरू की गई है, जिसमें सड़क, नालियां, ईवी चार्जिंग स्टेशन और आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इस प्रकार की योजनाओं से क्षेत्रीय व्यापारियों और उद्योगपतियों को लाभ होगा और निवेश का माहौल तैयार होगा।

सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत उत्पादन आधारित प्रोत्साहन लागू किया। इस योजना के तहत मोबाइल निर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसका नतीजा यह है कि कई वैश्विक कंपनियां भारत में अपने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित कर रही हैं। इससे देश का आयात पर निर्भरता कम होगी और निर्यात क्षमता बढ़ेगी। भारत धीरे-धीरे मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है।

लंबे समय से भारत में श्रम कानूनों को लेकर भ्रम और जटिलताएं थीं। हाल ही में सरकार ने 44 से अधिक पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर 4 श्रम संहिताएं लागू कीं। इससे मजदूरों और उद्योगपतियों दोनों को लाभ होगा। मजदूरों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा मिलेगी और उद्योगों को कर्मचारियों की भर्ती और प्रबंधन में आसानी होगी। इसके अलावा, ई-श्रम पोर्टल जैसी पहल ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को औपचारिक प्रणाली से जोड़ा है। इससे भविष्य में पेंशन, बीमा और अन्य सुविधाओं का लाभ उन्हें आसानी से मिल सकेगा।

भारत ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता किया है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच माल, सेवाओं और डिजिटल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, भारत और यूरोपियन यूनियन, ब्रिटेन तथा खाड़ी देशों के साथ भी मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है। हालांकि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में कुछ चुनौतियाँ हैं, क्योंकि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। इसके बावजूद भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा करेगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया और आपातकालीन क्रेडिट गारंटी योजना जैसी पहल ने छोटे व्यापारियों को वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसके अलावा, डिजिटल इंडिया अभियान ने छोटे व्यापारियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया है। आज छोटे व्यापारी भी ऑनलाइन मार्केटप्लेस के ज़रिए अपने उत्पाद देशभर में बेच पा रहे हैं।

हालांकि भारत में आर्थिक सुधार और नीतियों से सकारात्मक असर पड़ा है, लेकिन अभी भी कुछ चुनौतियाँ मौजूद हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी, बिजली और इंटरनेट की सीमित सुविधा, और वित्तीय साक्षरता की कमी बड़े अवरोध हैं। साथ ही, वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा, कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे भी भारत की औद्योगिक नीति को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत एशिया का सबसे बड़ा निवेश गंतव्य बन सकता है। जनसंख्या का बड़ा हिस्सा युवा है, जो एक तरफ उपभोक्ता है और दूसरी तरफ श्रम शक्ति भी। यह भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

भारत में आर्थिक सुधारों और औद्योगिक नीतियों ने व्यापार को नई दिशा दी है। कर व्यवस्था में पारदर्शिता, श्रम कानूनों का सरलीकरण, औद्योगिक नीतियों का क्षेत्रीय विकास पर ध्यान, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाएं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते ये सभी कदम भारत को एक वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित कर रहे हैं। भविष्य में यदि सरकार बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और तकनीकी नवाचार पर निरंतर ध्यान देती रही, तो भारत न केवल अपने नागरिकों के लिए रोज़गार और समृद्धि सुनिश्चित करेगा बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था में भी अहम भूमिका निभाएगा।

  • Related Posts

    Ballia News: ट्रेनों की बोगियों में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा होगी कड़ी, तस्करी पर लगेगी रोक

    भारतीय रेल देश की जीवनरेखा कही जाती है। लाखों यात्री रोज़ाना ट्रेनों से सफर करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। हाल ही में…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    भारत में आर्थिक सुधारों और औद्योगिक नीतियों से व्यापार को नई दिशा

    भारत में आर्थिक सुधारों और औद्योगिक नीतियों से व्यापार को नई दिशा

    गांजा के साथ पकड़े गए दोषी को एक साल की सजा

    गांजा के साथ पकड़े गए दोषी को एक साल की सजा

    Ballia News: ट्रेनों की बोगियों में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा होगी कड़ी, तस्करी पर लगेगी रोक

    Ballia News: ट्रेनों की बोगियों में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा होगी कड़ी, तस्करी पर लगेगी रोक